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शनिवार, 9 मई 2009

इतने सारे 'जी'...........


1 टिप्पणी:

  1. वाह अभिजीत भईया,
    आपने तो बिना फेंके ही मार दिया जूता।
    पता नहीं किसके-किसके सिर के उपर से जा रहा होगा। कौन बचेगा और किसको लगेगा।

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